धरती की ओर बढ़ रहा सूरज का महातूफान! भारत में भी दिख सकती है आसमान में रंग-बिरंगी रोशनी, वैज्ञानिकों ने जारी किया अलर्ट

नई दिल्ली: सूर्य की सतह पर हुए एक शक्तिशाली विस्फोट के बाद पृथ्वी की ओर तेजी से बढ़ रहे विशाल सौर तूफान ने वैज्ञानिकों की चिंता बढ़ा दी है। अंतरिक्ष एजेंसियों और अंतरिक्ष मौसम विशेषज्ञों के अनुसार, यह सौर गतिविधि आने वाले घंटों में पृथ्वी के चुंबकीय क्षेत्र को प्रभावित कर सकती है। इसके असर से दुनिया के कई हिस्सों के साथ भारत के उत्तरी क्षेत्रों में भी दुर्लभ ऑरोरा यानी रंग-बिरंगी रोशनी दिखाई देने की संभावना जताई जा रही है।

वैज्ञानिकों का कहना है कि सूर्य इस समय अत्यधिक सक्रिय अवस्था में है और पिछले कई दिनों से उसकी सतह पर लगातार शक्तिशाली विस्फोट दर्ज किए जा रहे हैं। इसी क्रम में एक विशाल कोरोनल मास इजेक्शन (CME) और घना सौर फिलामेंट पृथ्वी की दिशा में बढ़ रहा है।

1,400 किलोमीटर प्रति सेकंड की रफ्तार से बढ़ रहा सौर बादल

जानकारी के अनुसार, 6 जून को सूर्य के एक अत्यधिक सक्रिय क्षेत्र में M1.8 श्रेणी का सोलर फ्लेयर दर्ज किया गया। इस विस्फोट के साथ भारी मात्रा में चुंबकीय प्लाज्मा और गैसों का गुबार अंतरिक्ष में फैल गया।

विशेषज्ञों के मुताबिक यह सौर पदार्थ लगभग 1,400 किलोमीटर प्रति सेकंड की गति से पृथ्वी की ओर बढ़ रहा है। इतनी तेज गति और उच्च घनत्व वाले फिलामेंट के कारण इसके प्रभाव को लेकर वैज्ञानिक लगातार निगरानी बनाए हुए हैं।

क्या होता है सौर फिलामेंट?

सौर फिलामेंट सूर्य की सतह पर मौजूद घने और अपेक्षाकृत ठंडे प्लाज्मा का विशाल ढांचा होता है, जो चुंबकीय क्षेत्रों के सहारे टिका रहता है। जब यह चुंबकीय संरचना अस्थिर हो जाती है, तो फिलामेंट टूटकर अंतरिक्ष में फेंका जाता है और विशाल सौर तूफान का रूप ले सकता है।

वैज्ञानिकों का मानना है कि इस बार पृथ्वी की ओर बढ़ रहा फिलामेंट सामान्य घटनाओं की तुलना में अधिक घना और शक्तिशाली है, जिससे भू-चुंबकीय प्रभाव भी ज्यादा हो सकते हैं।

G3 श्रेणी के जियोमैग्नेटिक तूफान की चेतावनी

अंतरिक्ष मौसम विशेषज्ञों ने पृथ्वी पर G3 श्रेणी के जियोमैग्नेटिक तूफान की संभावना जताई है। इस स्तर का तूफान उपग्रह संचार, रेडियो सिग्नल और कुछ तकनीकी प्रणालियों को प्रभावित कर सकता है।

हालांकि वैज्ञानिकों का कहना है कि आम लोगों के लिए इससे किसी बड़े खतरे की आशंका नहीं है, लेकिन अंतरिक्ष और संचार प्रणालियों पर इसका असर पड़ सकता है।

भारत में दिख सकता है दुर्लभ ऑरोरा

इस सौर तूफान का सबसे आकर्षक पहलू ऑरोरा है। जब सूर्य से आने वाले आवेशित कण पृथ्वी के ऊपरी वायुमंडल में ऑक्सीजन और नाइट्रोजन जैसी गैसों से टकराते हैं, तब आसमान में हरे, लाल और बैंगनी रंग की चमकदार रोशनी दिखाई देती है।

सामान्यतः यह दृश्य केवल ध्रुवीय क्षेत्रों में देखा जाता है, लेकिन शक्तिशाली जियोमैग्नेटिक तूफानों के दौरान इसका दायरा निचले अक्षांशों तक फैल सकता है।

विशेषज्ञों के अनुसार यदि मौसम साफ रहा तो लद्दाख, नुब्रा घाटी, पैंगोंग झील क्षेत्र, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड के कुछ ऊंचे इलाकों में यह दुर्लभ खगोलीय नजारा दिखाई दे सकता है।

दो सौर तूफानों के मिलने से बढ़ सकती है तीव्रता

वैज्ञानिकों का मानना है कि अंतरिक्ष में पहले से मौजूद धीमी गति वाले सौर बादलों के साथ यह नया और तेज सौर बादल मिल सकता है। ऐसी स्थिति को “कैनिबल सीएमई” कहा जाता है।

यदि ऐसा हुआ तो दोनों सौर तूफान मिलकर और अधिक शक्तिशाली रूप ले सकते हैं, जिससे पृथ्वी पर भू-चुंबकीय प्रभाव अपेक्षा से अधिक तीव्र हो सकते हैं।

अंतिम प्रभाव का पता आखिरी घंटे में चलेगा

विशेषज्ञों के अनुसार इस सौर तूफान की वास्तविक ताकत इस बात पर निर्भर करेगी कि इसके भीतर मौजूद चुंबकीय क्षेत्र पृथ्वी के चुंबकीय क्षेत्र के साथ किस प्रकार प्रतिक्रिया करता है।

अंतरिक्ष में पृथ्वी से लगभग 15 लाख किलोमीटर दूर स्थित निगरानी उपग्रहों से मिलने वाले अंतिम आंकड़ों के आधार पर ही यह स्पष्ट हो पाएगा कि तूफान का प्रभाव कितना व्यापक होगा। वैज्ञानिकों का कहना है कि इसकी सटीक स्थिति का अनुमान पृथ्वी तक पहुंचने से केवल 15 से 60 मिनट पहले ही लगाया जा सकेगा।

 

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